महारानी ने एक बात बोली,अमित शाह ने एक बात बोली और उसी तरह की बात इमरान मसूद ने बोली
लेकिन सज़ा सिर्फ इमरान मसूद को हुई हाँ बात और होती यदि इमरान मसूद की जगह कोई ''इन्दर मोहन'' होता
बात बहुत सारी हैं उदारहण बहुत सारे हैं इसलिए ज़बरदस्ती की ग़लतफ़हमी,भ्रम और खुशफहमी नहीं पालना चाहता ज़बरदस्ती के आडम्बर,पाखंड को आत्मसात नहीं करना चाहता
कितने लोगों को लगता है की भारत में ''कानून'' सबके के लिए बराबर है ????
कितनों लोगों को लगता है की भारत में ''न्याय'' सभी के साथ होता है ????
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