लखवी और माया कोडनानी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं मगर तथाकथित राष्ट्रवादी
कुमार विश्वास और तथाकथित राष्ट्रवादियों की जमात भाजपा को सिर्फ लखवी की
जमानत से दिक्कत है। माया तो उनके राष्ट्रवाद की भट्ठी से निकली वह बहादुर
महिला है जिसकी अगुवाई में सौ से अधिक लोग जिंदा जलाये गये थे। तुम माया
कोडनानी की जमानत हज्म कर लेते हो तो तुम्हे यह बिल्कुल भी नही कि तुम अपने
मुंह से लख्वी की जमानत पर छाती कूटो । दौगले हो तुम और दौगला व ढोंगै है
तुम्हारा यह राष्ट्रवाद। पहले अपने घर का कूडा तो साफ कर लो ।
Sunday, March 15, 2015
धर्मनिर्पेक्षता, स्पष्टता , सत्यता
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि अब भारतीय मीडिया की मंडी लगती है और ये मीडिया ज़्यादा दाम वाले की गुलामी करती है,,, अब ऐसे में हमारे सोशल मीडिया के दोस्त-भाइयों ने मिलकर एक नई मैगज़ीन "विज़न मुस्लिम टुडे" निकाली है ।।।
ये मासिक मैगज़ीन उर्दू, हिंदी, इंग्लिश भाषा में है और बहुत सस्ती है ।।। इस मैगज़ीन के ज़रिये से हमारे साथी हक़ की आवाज़ को बुलंद करते हैं और जो बातें ये दोगली बिकाऊ मीडिया हमतक नहीं पहुचाती उस बात को हमारी ये मैगज़ीन हर आम इंसान तक पहुचाती है,,, आप लोग हमारा थोडा सहयोग करेंगे तो ये मेगज़ीन के ज़रिये हम हक़ की आवाज़ को बुलंद करते रहेंगे,,, आपका साथ ही हमारी हिम्मत है ।।।
10, 20, 25 रूपए अगर हम मासिक खर्च कर दें तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा मगर सच्चाई हमतक पहुँचती रहेगी,,, इसीलिए भाइयों थोडा सा सहयोग कीजिये और इस मैगज़ीन को उठाने में हमारा साथ दीजिये,,, ये दिल्ली से निकलती है मगर फिर भी ज़्यादा जानकारी के लिए आप muslimtodayhindi@gmail.com (Mobile No. :- 08447870786) पर ज़्यादा जानकारी ले सकते हैं,,, हक़ की आवाज़ में आपके साथ का इंतज़ार है ।।। आइये साथ चलें ।।।
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Aaj Ki Baat Hamar e Sath !
चर्च के अंदर हनुमान की मूर्ती रखने से पहले अगर यह सोच लिया होता कि जबरन हथियाई जमीन पर ‘राम’ नहीं आते तो शायद ही फिर असमाजिक लॉबी इस कारनामे को अंजाम देती। इस देश में फांसिज्म पनप नहीं रहा बल्कि जवान हो रहा, अखबार के पन्ने एसी घटनाओं से स्याह होते दिख रहे हैं जिनमें एक समाज को दूसरे समाज के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है ताकि जनता रोजी रोटी न मांग सके, रोजगार न मांग सके, इसलिये अधर्मी धर्म का सहारा ले रहे हैं। रेडियो पर ‘मन की बात’ और जमीन पर ‘स्वच्छ भारत’ अभियान चलाने वाले प्रधानमंत्री को क्या यह कूड़ा नजर नहीं आता ? क्या ये वह दंगाई हैं जो प्रधानमंत्री के ‘मन’ का काम कर रहे हैं ? कभी चर्च में हनुमान को बैठाकर तो कभी चर्च पर हमला करके। किसान अलग आत्महत्याऐं कर रहे हैं, 58 दिन में 135 किसान फांसी के फंदे पर झूल गये हैं क्या उनका भी कोई धर्म रहा होगा ? अगर धर्म के इन खैरख्वाहों को इतनी ही धर्म की फिक्र थी तो क्यों झूलने दिया उन्हें फांसी पर ?
चर्च के अंदर हनुमान की मूर्ती रखने से पहले अगर यह सोच लिया होता कि जबरन हथियाई जमीन पर ‘राम’ नहीं आते तो शायद ही फिर असमाजिक लॉबी इस कारनामे को अंजाम देती। इस देश में फांसिज्म पनप नहीं रहा बल्कि जवान हो रहा, अखबार के पन्ने एसी घटनाओं से स्याह होते दिख रहे हैं जिनमें एक समाज को दूसरे समाज के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है ताकि जनता रोजी रोटी न मांग सके, रोजगार न मांग सके, इसलिये अधर्मी धर्म का सहारा ले रहे हैं। रेडियो पर ‘मन की बात’ और जमीन पर ‘स्वच्छ भारत’ अभियान चलाने वाले प्रधानमंत्री को क्या यह कूड़ा नजर नहीं आता ? क्या ये वह दंगाई हैं जो प्रधानमंत्री के ‘मन’ का काम कर रहे हैं ? कभी चर्च में हनुमान को बैठाकर तो कभी चर्च पर हमला करके। किसान अलग आत्महत्याऐं कर रहे हैं, 58 दिन में 135 किसान फांसी के फंदे पर झूल गये हैं क्या उनका भी कोई धर्म रहा होगा ? अगर धर्म के इन खैरख्वाहों को इतनी ही धर्म की फिक्र थी तो क्यों झूलने दिया उन्हें फांसी पर ?
Before
placing the Hanuman Idol inside the church if it would forcibly taken
in on the floor thinking ' RAM ' is not the only execute this
anti-social lobby does feat. Not phansijm in this country are rather
young, flourishing newspaper are the sepia look by AC events page which
stands against another society a society being so that the public could
not demand, not demand jobs Rosie bread can therefore take the religion
of lawless one. Speaking of ' mind ' on the radio and on the ground
"clean India campaign ' running the Prime Minister not to watch this
garbage? Are these the rioter who Prime Minister "mind" are? Never never
sitting in Church by Church attack Hanuman. Farmers are different
atmahatyaain, 58 day hanging noose are swinging at 135 farmer what he
must have been a religion? If religion was the only religion to worry
these khairakhvahon so then why have them hanging on swings?
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