Tuesday, August 18, 2015

यु ए ई में अबुधाबी राजा द्वारा मंदिर के लिए जमीन देने की बात पर अंधभक्त ऐसे बंदर की तरह उछल उछल कर नाच रहे हैं जैसे कुत्ते को जमीन पर लोटने से कोई पुरानी खुजली मिट गई हो । और व्हाट्सऐप और फेसबुक पर मैसेजों को इस तरह फैलाया जा रहा है " मोदी से डर कर अबुधाबी के राजा ने मंदिर के लिए जमीन दि है "
तो चमन चुतीयों तुम्हारी जानकारी के लिए बता दुँ यु ए ई के रियासत दुबई में मंदिर तब से है जब तुम्हारा मोदी पैदा भी नहीं हुआ था । दुबई सिटी में एक जगह है डेरा जहाँ मंदिर आज भी है । और हिन्दु भाई अपने हर पर्व पर पुजा के लिए मंदिर जाते हैं जहाँ सुरक्षा और हर तरह की ईंतेज़ाम की जिम्मेदारी वहाँ की स्थानीय पुलीस की होती है ।
वही कंडीशन ओमान की राज़धानी मसकत का भी है । क़तर की राज़धानी दोहा में भी मंदिर है । और कोई हिन्दु भाई कह दे की ईन सब जगहों पर किसी भी तरह की परेशानी होती हो ? तो मै पुरी ज़िन्दगी गुलामी करने को तैय्यार हुँ ।
मुस्लिम देश हों या मुस्लिम राजाओं द्वारा भारत पर शाषण । कभी भी किसी धार्मिक स्थल को दिवार नहीं बनाया गया । ईस बात का तो ईत्तिहास भी गवाह है । पर जिसने सही ईत्तिहास पढ़ा हो तब । आर एस एस और बजरंग दल के इत्तिहास में नहीं ।
पर कुछ टुच्चों के हाथ में देश की बागडोर जाते ही धर्मीक कट्टरता और हैवानियत की सिमा पार हो चुकी है । घटीया सोंच वालों ने पिछवाड़े से नहीं मुंह से हगना शुरू कर दिया है ।
तुम उन लोगों को अमन का तरीका सिखा रहे जहाँ इंसानियत को ही अमन समझा जाता है । पर तुम्हे शर्म कहाँ जब राष्ट्र वादियों द्वारा किसी एक समुदाय के लिए ज़हर उगला जाता हो ।
‪#‎नसरूद्दिन‬ सिद्दीक़,

Tuesday, June 16, 2015

Madni Sarkar Gorup Morbi

🔊Khushkhabar 🔊
Ab "Madni Sarkar Gorup " " SoundCloud " Par Jisme Mp3 Naat Sharif  Ka Khajana , 
Ya Madni Sarkar ( 555 )
Hear Naat https://soundcloud.com/madni-sarkar-gorup/sets/naat, a playlist on #SoundCloud.

Check out the SoundCloud app for your smartphone. Download it at http://get.soundcloud.com/scfriendrefios


Sunday, March 15, 2015

लखवी और माया कोडनानी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं मगर तथाकथित राष्ट्रवादी कुमार विश्वास और तथाकथित राष्ट्रवादियों की जमात भाजपा को सिर्फ लखवी की जमानत से दिक्कत है। माया तो उनके राष्ट्रवाद की भट्ठी से निकली वह बहादुर महिला है जिसकी अगुवाई में सौ से अधिक लोग जिंदा जलाये गये थे। तुम माया कोडनानी की जमानत हज्म कर लेते हो तो तुम्हे यह बिल्कुल भी नही कि तुम अपने मुंह से लख्वी की जमानत पर छाती कूटो । दौगले हो तुम और दौगला व ढोंगै है तुम्हारा यह राष्ट्रवाद। पहले अपने घर का कूडा तो साफ कर लो ।
धर्मनिर्पेक्षता, स्पष्टता , सत्यता
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि अब भारतीय मीडिया की मंडी लगती है और ये मीडिया ज़्यादा दाम वाले की गुलामी करती है,,, अब ऐसे में हमारे सोशल मीडिया के दोस्त-भाइयों ने मिलकर एक नई मैगज़ीन "विज़न मुस्लिम टुडे" निकाली है ।।।
ये मासिक मैगज़ीन उर्दू, हिंदी, इंग्लिश भाषा में है और बहुत सस्ती है ।।। इस मैगज़ीन के ज़रिये से हमारे साथी हक़ की आवाज़ को बुलंद करते हैं और जो बातें ये दोगली बिकाऊ मीडिया हमतक नहीं पहुचाती उस बात को हमारी ये मैगज़ीन हर आम इंसान तक पहुचाती है,,, आप लोग हमारा थोडा सहयोग करेंगे तो ये मेगज़ीन के ज़रिये हम हक़ की आवाज़ को बुलंद करते रहेंगे,,, आपका साथ ही हमारी हिम्मत है ।।।
10, 20, 25 रूपए अगर हम मासिक खर्च कर दें तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा मगर सच्चाई हमतक पहुँचती रहेगी,,, इसीलिए भाइयों थोडा सा सहयोग कीजिये और इस मैगज़ीन को उठाने में हमारा साथ दीजिये,,, ये दिल्ली से निकलती है मगर फिर भी ज़्यादा जानकारी के लिए आप muslimtodayhindi@gmail.com (Mobile No. :- 08447870786) पर ज़्यादा जानकारी ले सकते हैं,,, हक़ की आवाज़ में आपके साथ का इंतज़ार है ।।। आइये साथ चलें ।।।

निचे दिए गए लिंक। पर क्लिक कर के आप मैगज़ीन का आर्डर इनबॉक्स में दे सकते हैं...
Muslim Today https://m.facebook.com/muslimtodaynews…
Aaj Ki Baat Hamar e Sath !
चर्च के अंदर हनुमान की मूर्ती रखने से पहले अगर यह सोच लिया होता कि जबरन हथियाई जमीन पर ‘राम’ नहीं आते तो शायद ही फिर असमाजिक लॉबी इस कारनामे को अंजाम देती। इस देश में फांसिज्म पनप नहीं रहा बल्कि जवान हो रहा, अखबार के पन्ने एसी घटनाओं से स्याह होते दिख रहे हैं जिनमें एक समाज को दूसरे समाज के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है ताकि जनता रोजी रोटी न मांग सके, रोजगार न मांग सके, इसलिये अधर्मी धर्म का सहारा ले रहे हैं। रेडियो पर ‘मन की बात’ और जमीन पर ‘स्वच्छ भारत’ अभियान चलाने वाले प्रधानमंत्री को क्या यह कूड़ा नजर नहीं आता ? क्या ये वह दंगाई हैं जो प्रधानमंत्री के ‘मन’ का काम कर रहे हैं ? कभी चर्च में हनुमान को बैठाकर तो कभी चर्च पर हमला करके। किसान अलग आत्महत्याऐं कर रहे हैं, 58 दिन में 135 किसान फांसी के फंदे पर झूल गये हैं क्या उनका भी कोई धर्म रहा होगा ? अगर धर्म के इन खैरख्वाहों को इतनी ही धर्म की फिक्र थी तो क्यों झूलने दिया उन्हें फांसी पर ?
Before placing the Hanuman Idol inside the church if it would forcibly taken in on the floor thinking ' RAM ' is not the only execute this anti-social lobby does feat. Not phansijm in this country are rather young, flourishing newspaper are the sepia look by AC events page which stands against another society a society being so that the public could not demand, not demand jobs Rosie bread can therefore take the religion of lawless one. Speaking of ' mind ' on the radio and on the ground "clean India campaign ' running the Prime Minister not to watch this garbage? Are these the rioter who Prime Minister "mind" are? Never never sitting in Church by Church attack Hanuman. Farmers are different atmahatyaain, 58 day hanging noose are swinging at 135 farmer what he must have been a religion? If religion was the only religion to worry these khairakhvahon so then why have them hanging on swings?

Monday, October 13, 2014

  

मैंने संघ क्यों छोड़ा?


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी अपने को 'राष्ट्रवादी' विचारधारा से संचालित संगठन बताते हैं.

मेरे विचार से भारत में 'राष्ट्रवाद' की विचारधारा की जनक भाजपा से ज़्यादा कांग्रेस रही है.

वहीं, संघ की विचारधारा एक समुदाय मात्र को मजबूत करने वाली प्रतीत होती है.

भारत जैसी सांस्कृतिक विविधता वाले देश में किसी एक समुदाय के बजाय सभी समुदायों को लेकर चलने वाली विचारधारा ही ज़रूरी प्रतीत होती है.

पढें विकास पाठक का लेख विस्तार से

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक

मैं अपने परिवार को 'राष्ट्रवादी' इसलिए कहता हूँ कि मेरे पिता अर्धसैनिक बल में थे और मैं उसी परिवेश में पला और बड़ा हुआ.

पहले इस बात में यक़ीन करता था कि लोग किसी विचारधारा से सहमत होने के बाद ही उससे जुड़ते हैं.

मैं उत्तर भारत के एक उच्च जाति के हिंदू परिवार से हूँ. मेरी किशोरावस्था के दौरान रामजन्मभूमि आंदोलन और मंडल आंदोलन अपने चरम पर था.

समाज भारतीय जनता पार्टी की ओर झुक रहा था. ख़ासकर वो समाज, जिससे मैं आता हूँ.

'राष्ट्रवाद' मेरे परिवार के अंदर था.

स्नातक की पढ़ाई के दौरान संसद में अटल बिहारी वाजपेयी के भाषणों से मैं काफ़ी प्रभावित रहा. लेकिन, जब मैं एमए करने के लिए जेएनयू पहुँचा तो मुझे बड़ा सांस्कृतिक झटका लगा.

अलगाववादी या राष्ट्रविरोधी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक

जेएनयू में कश्मीरी अलगाववादियों को भी बुलाया जाता था, जो मेरे लिए झटके जैसा था. मुझे लगता था कि ऐसा करना राष्ट्रविरोधी है.

मुझे यह भी लगने लगा कि साम्यवादी आंदोलन राष्ट्रविरोधी है. इससे मेरा झुकाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर होता चला गया.

1998 में ऐसा मौक़ा भी आया जब मैं इसमें पूरी तरह सक्रिय हो गया. धीरे-धीरे मेरी अपनी पहचान विद्यार्थी परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में होनी शुरू हो गई.

मैं पाँच-छह साल तक विद्यार्थी परिषद से जुड़ा रहा. इस दौरान मैं विद्यार्थी परिषद के वैचारिक पर्चे लिखा करता था. मेरी सक्रियता वैचारिक ही थी.

परिषद से जुड़े आंदोलनों से मुझे भावनात्मक समर्थन मिल रहा था और मेरी जान-पहचान भी इससे जुड़े लोगों से ही हो रही थी.

शोध और समझ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक

एमफिल और पीएचडी के दौरान मैंने बीसवीं सदी की शुरुआत में हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलनों पर अध्ययन करना शुरू किया.

इस पर गहन अध्ययन के दौरान बौद्धिक स्तर पर मुझे दो चीज़ें समझ में आईं.

पहली ये कि भारतीय राष्ट्रवाद में जनसंघ या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कोई भूमिका नहीं थी. हक़ीक़त यह है कि भारतीय राष्ट्रवाद में सबसे अहम भूमिका कांग्रेस की ही थी.

शोध के दौरान मुझे भारत की आज़ादी के आंदोलन में संघ की सक्रिय भूमिका का कोई प्रमाण नहीं मिल पाया. बौद्धिक स्तर पर मेरी राष्ट्रवाद की शुरुआती समझ को उसी समय बड़ा झटका लगा.

शोध के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँचा कि संघ राष्ट्रवाद का एकमात्र प्लेटफॉर्म नहीं है. मगर इसका मतलब क़तई यह नहीं है कि 'राष्ट्रवाद' में संघ की भूमिका का हवाला देकर आज भाजपा पर सवाल उठाए जाएं.

बदलता संदर्भ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक

शोध के बाद संघ की कमजोरियाँ और ताक़त मेरे सामने खुलकर आने लगीं. मूल रूप से यह आंदोलन हिंदुओं को एकजुट करने का था. हालांकि मैंने संघ से दूरी इस ज्ञान के मिलने के बाद नहीं बनाई.

मैं 2004 में संघ से दूर हुआ. जेएनयू से निकलने के बाद मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई शुरू की.

जेएनयू से संपर्क टूटने के बाद मेरी विचारधारा का संदर्भ भी बदलना शुरू हो गया. जब मैं जेएनयू में था तब विद्यार्थी परिषद मेरे लिए सब कुछ थी. लेकिन अब मैं एक पत्रकार बन रहा था.

इससे विद्यार्थी परिषद के साथ जुड़े रहने की मेरी बौद्धिक, वैचारिक और भावनात्मक ज़रूरतें नहीं रहीं. धीरे-धीरे मैं परिषद से दूर होता गया. हालांकि मैं किसी और विपक्षी विचारधारा से भी नहीं जुड़ा.

मतभेद के बिंदु

विकास पाठक
विकास फिलहाल अध्यापन के पेशे से जुड़े हुए हैं.

मैं गांधी की विचारधारा और सावरकर की विचारधारा के बीच के फ़र्क को समझने लगा था.

एक की विचारधारा मतभेदों को नज़रअंदाज़ करके जोड़ने वाले बिंदु खोजने की है. महात्मा गांधी का एजेंडा मतभेदों को दूर करने का था.

जबकि दूसरे की विचारधारा अपने समुदाय को मजबूत करने की थी.

ये एक समुदाय के विकास का मॉडल है जबकि गांधी की विचारधारा सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की लगती है.

मुझे लगता है कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में साथ चलना वक़्त की ज़रूरत है.

मैं गांधीवादी विचारधारा से पूरी तरह प्रभावित हो गया. वक़्त के साथ मेरी रुचि भी बदली और मैं संघ से अलग हो गया.

(बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बातचीत पर आधारित)

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Wednesday, October 1, 2014

Morbi Madni Sarkar Gorup

-> Jashn-E-Mushar'rat<-
-----------------------
Ba Zill e Roohani MADNI SARKAR
-----------------------

Tamaam Sunnu MusLimo Ko Yeh Khush'Khabri Di Jaati Hai Ki,.
 MADNI Edu. & Cheri. Trust Ki SarParasti Me Morbi Ka Pahela DaruL-Uloom Madresa
 FAIZAAN E MADNI SARKAR
Aur
 IsLamic M.S  ENGLISH SCHOOL

Ka Ta'miri Kaam Sharu Kiyaa Jaa Gayaa Hai Is ke Ta'look Se Ek JaLse Ka Progrrame Rakhaa Gayaa Hai To Aap Tamaami Hazraat Ko Aane Ki Da'wat di Jaati Hai..!


MUKARRER E KHAAS
 Hazrat ALLama MowLaana, Maahir E Mantik Wa Falsafaa,.. MUFTI AALAMGEER MISBHAAI SAAHAB (AoujaGanj, U.P.)

Wa

 Hazrat ALLama Al'Haaj AaLim e Ba'AmaL MUFTI MUHAMMAD MOHSIN RAZA SAHEB RAZVI (Shaikh ul Hadees, Da.Uloom Dhrol) 

Takreer Farmaakar Dilo Ko Ma'moor o Munawwar Farmaayenge.
*----------*****---------*

Zer e Sadarat :- 
~> Shahzada e Madni Sarkaar
SAYYED ABDUL'RASHEED MIYAn Qadri Ul JiLLani
*-------****-------*

Zer e Nigraniyat wa Daa'watGeer 
~> Shahezada e Madni Sarkar
SAYYED MUHAMMAD SIDDIQ MIYAn Qadri
(JiLLani Miya)
----------------------

DATE :- 2-10-2014, JUM'ERAT

Time :- 9:30 pm

Add :- SIPAHI WAAS, CHOWK, NAHERU GATE, MORBI
---*-*-*----
Ad'dayi :- 

Arakine E MADNI EDUCATION & CHERITEBAL TRUST-MORBI.
Wa

MADNI SARKAR GROUP-MORBI

Monday, September 15, 2014

Pir Kaisa Hona Chahiye ?
Pir Ko Kaisa Hona Chahiye ?
Is Video Ko Dekhu
Taki Aap Ko Sache Pir Ki Pehchanna Aasni Hugi,
Inshallah 
💠👇👇👇💠

http://youtu.be/SW6faDr60DA

Monday, September 8, 2014

Hq Murshid Ya Murshid 

Ya Madni Sarkar 

Mere Murshid Ki Juban Se Nikla Howa Piyara Jumlah -: " Huseni Kirpaa" :-

( Mera Hal Chahe Kuchh Bhi Ho Mera Akidah Hai Bas Yahi

Bakhsh Vaei Ghi Mujko Teri Muhabbat Ya Husen,)

Hq Husen Mula Husen ya Husen


Monday, September 1, 2014

Khushkhabr 📢

Ab Facebook Par 

Madni Sarkar Gorup Morbi

Ka officially pages

-: Madni Sarkar :-

To Aap Bhi Like Karo Aur Gorup Ka Hisa Bano,

Saiyed Jillani Miya


Sunday, August 31, 2014

Aaj Ka Pegam 📣


Aaj Ki Baat Mere Sath !

कल रोगी उर्फ योगी बोल गऐ, और यहां तक कह गये कि “जहां 10 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान होते हैं दंगे वहीं होते हैं” सवाल यह पैदा होता है कि गुजरात में पांच प्रतिशत मुसलमान हैं वहां दंगे क्यों हुऐ ? मुजफ्फरनगर के कुटबा, कुटबी, लिसाढ़, फुगाना, लाख, काकड़ा, सिसोली, कुल्हेड़ी, यह लिस्ट और भी तवील हो सकती है, इन गांवों में मुसलमानों का प्रतिशत मात्र एक प्रतिशत था तो यहां पर इन लोगों को क्यों मारा गया ? और उस पर विडंबना देखिये जिन लोगों के साथ हिंसक वारदातें हुईं उनका ताअल्लुक धर्म विशेष से जरूर था। मगर उनमें से अधिकतर को नमाज के दौरान की जाने नीयत तक का इल्म नहीं था। भूल गये क्या कहा था कुटबा के उस शमीम ने जिसके परिवार के चार लोगों का कत्ल किया गया था। उस 70 वर्षीय हाड़ मांस के आदमी ने कंपकपाती हुई जुबां से कहा था कि ‘हम न मुसलमान हैं न हिंदू, हम तो गरीब हैं’। बहरहाल योगी आदित्यनाथ ने एक बयान और दिया जिसमें कहा गया कि एक लड़की के बदले 100 लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया जायेगा। इन दोनों बयानों की जरूरत आखिर इसी समय क्यों पड़ी ? क्या आदित्य को पहले मालूम नहीं था कि कहां दस प्रतिशत मुस्लिम होते हैं और कहां धर्म परिवर्तन हो रहा है ? अगर प्रतिशत की ही बात की जाये तो केरल में 25 प्रतिशत मुस्लिम हैं मगर वहां कभी दंगा नहीं हुआ। जिसकी वजह केरल में भाजपा का न होना है। खैर ये बयान क्यों दिये गये इसके गर्भ में जाना जरूरी है। अभी कुछ ही दिनों बाद उत्तर प्रदेश में उप चुनाव होने जा रहे हैं जिसकी बागडोर भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को सौंपी है। अब जब भाजपा काठ (लकड़ी) की बनी विकास की हांडी को भाड़ पर चढ़ा चुकी है तो फिर उसी पुराने ऐजेंडे पर लौट आई है। उसी के गर्भ से इन बयानों का जन्म होना शुरु हुआ है और होता रहेगा। अब सवाल है कि ऐसा क्यों होता है क्यों कोई आदित्यनाथ, प्रवीण तोगड़िया फिजा में जहर घोल देता है ? इसका सीधा सा उत्तर है कि कल जो लोग अकबर औवेसी के शर्मनाक बयान पर हाय तौबा कर रहे थे आज वही तथाकथित सैक्यूलर और शान्ति के पुजारी खामोश हैं। वे शायद नहीं जानते कि उनकी मुजरिमाना खामोशी ही हर रोजा तोगड़िया पैदा करती है, हर दिन किसी सिंघल का जन्म होता है, हर दिन किसी न किसी योगी आदित्यनाथ का जन्म होता है। और फिर इनकी देखा देख अकबर औवेसी भी पैदा हो जाता है। इनके पैदा होने से जो नुकसान होता है वह मेरा होता है या फिर तुम्हारा। बेहतर होता कि इनकी जुबानों के बंद करने के लिये खुद को सैक्यूलर कहने वाले सड़कों पर आते, सोश साईट्स पर अभियान चलाते, मगर ऐसा नहीं हो पाया अब इसका खामियाजा किस शहर को भुगतना पड़ेगा सिर्फ यह देखना बाकी है।

Saturday, August 30, 2014

Aaj Ki Baat !

जिहाद लव नहीं होता, न ही लव जिहाद होता, मगर हमारी हिंदी मंडिया ( मीडिया ) जिहाद को जिस तरह से प्रचारित और प्रसारित कर रही है, उसने जिहाद का शाब्दिक अर्थ ही बदल दिया है। इसी मुद्दे पर देखिये दिलचस्प बहस इस लिंक।

Aaj Ki Baat Mere Sath !

ISIS ने आज 200 सीरियाई सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया है। इस वहशियाना कत्ल ओ गारत पर लानत भेजें, मगर सिर्फ वही लोग इस लानत को भेजने के अधिकारी हैं जिन्होंने बशर अल असद सरकार, इजरायल पर लानत भेजी है...... जनहित में जारी

Aaj Ki Baat !

पहले बाबू बजरंगी फिर असीमानंद और कल कोई किसी और को जमानत मिल जायेगी। यही है अच्छे दिनों का आगाज। अब ये मत कहना कि बम विस्फोट क्यों होते हैं ? और हमेशा निर्दोष ही क्यों पकड़े जाते हैं ? और दोषी क्यों बच जाते हैं ? अभी आगे – आगे देखिये क्या होता है। अभी तो गोडसे को वीर चक्र या भारत रत्न भी दिया जाये तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिये। सोशल जस्टिस की धज्जियां उड़ाने वाले संघी न्यायधीशों ने भी मन में आशा पाल रखी है रिटायरमेंट के शायद किसी आयोग की अध्यक्षता मिल जाये या फिर किसी राज्य के राज्यपाल का पद। इसी आशा के साथ वे न्याय की देवी के साथ ‘बलात्कार’ कर रहे हैं ।

Tuesday, August 5, 2014

Aaj Ki Baat !

पिछले 65 साल से भारत में दंगों का वीभत्स इतिहास रहा है। जब भी कहीं भी दंगा होता है उसी दौरान अक्सर सवाल उठाये जाते हैं कि सरकार दंगा में रोकने में इतनी बेबस क्यों है ? एक तरफ दंगा रोकने और दंगाईयों को सबक सिखाने की बात होती हैं दूसरी ओर सरकारी मशीनरी उन्हें खुली छूट दे देती है कि जाओ और मार काट करो। ताजा मामला चर्चित गुजरात के नरोदा पाटिया नरसंहार का है जिसमें सजा याफ्ता माया कोडनानी को गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत देदी है। अगस्त 2012 में गुजरात की एक विशेष अदालत ने माया कोडनानी और बजरंग दल नेता बाबू बजरंगी समेत 31 लोगों को नरोदा पटिया नरसंहार का दोषी करार दिया था. कोर्ट ने उन्हें “नरोदा इलाके में दंगों की सरगना” क़रार दिया था और 26 साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी. इसके बाद नवंबर 2013 में गुजरात उच्च न्यायालय ने माया कोडनानी को स्वास्थ्य कारणों से तीन महीने की अस्थायी ज़मानत दे दी थी. माया कोडनानी आज फिर सलाखों से बाहर खुली हवा में सांस ले रही हैं, ऐसे में दंगों और दंगाईयों पर काबू पाया जाये तो कैसे ? अव्वल तो दंगाईयों को जल्दी से सजा नहीं मिल पाती अब अगर मिली भी थी तो उसे गुजरात न्यायपालिका ने बहाल कर दिया है। इस तरह के फैसले एक आम इंसान को यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि अगर आपके पास पैसा है, नाम है, राजनीतिक गलियारों में आपका दखल है तो फिर कोई अदालत आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। कोडनानी को जमानत देने से पहले कोर्ट को उन लोगों के बारे में भी सोचना था जो इनकी मानवीय त्रासदी की भेंट चढ़े हैं, जो लंगड़े, लूले हुऐ हैं, और एक बार उनके बारे में भी सोचना चाहिये था जो दंगों में मारे गये, मगर अफसोस उनके पास न जमानत है न जमानती, और ये दुनिया चाहकर भी उन्हें जमानत नहीं दे सकती। मगर कोडानानियों का क्या बुलेट प्रूफ गाड़ी,बुलेट प्रूफ कमरा, और ऐसे ही वस्त्र,फिर इनको क्यों और किससे खतरा होगा ? एक आम आदमी अगर अपनी भूख मिटाने के लिये रोटी चुराता (चोर का पक्ष नहीं लिया जा रहा है )है तो उसे जमानत मिलने में बरसों लग जाते हैं और यहां माया कोडनानी जैसे सैंकड़ों लोगों के कातिल अंदर बाहर का खेल खेल रहे हैं, वास्तव में अच्छे दिन आये हैं, हमारे या आपके नहीं बल्कि चोर बदमाश, गुंडे, हत्यारों, बलात्कारियों के। Shame On This

Aaj Ki Baat !

मेरठ में धर्म परिवर्तन और गैंगरेप की घटना को महज पीड़िता के बयानों और कुछ संगठनों के बवाल के आधार पर ऐसा माहौल बना बना दिया गया है कि कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि सच क्या है?
पीड़िता कह रही है कि उसे दुबई भेजने की तैयारी थी। क्या दुबई जाना अपने देश की तरह महज एक शहर से दूसरे शहर जाना भर है? क्या पीड़िता के पास पासपोर्ट है? यदि नहीं है, तो क्या उसने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया हुआ है?
4 अगस्त के अमर उजाला में प्रकािशत खबर के अनुसार, पीड़िता की बहन कह रही है कि उसकी बहन 23 जुलाई को यह कहकर गई थी कि वह कॉलेज की ओर से सहेलियों के साथ टूर पर जा रही है। शाम तो लौट आऊंगी। शाम को जव वह नहीं आई तो उसे फोन किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ, लेकिन उसकी तरफ से मैसेज आया कि दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में हूं, अभी नहीं लौटूंगी। 24 जुलाई को उसने कहा कि पेट की आंत फट गई है, साथ आए लोगों ने आॅप्रेशन करा दिया है। हालत सही होने पर लौट आऊंगी। 25 जुलाई को उसे फोन किया गया तो उसने बताया कि वह मथुरा में है। पीड़िता ने छोटी बहन को यह भी हिदायत दी कि मां से आॅपरेशन में बारे में मत बताना। 27 जुलाई को उसने हापुड़ से कहा कि वह घर आ रही है। 29 जुलाई को उसका अपहरण हो जाता है।
यह तो पता लगाना ही चाहिए कि 23 जुलाई से 27 जुलाई तक पीड़ित युवती कहां और किसके साथ थी? मोबाइल फोन से पता चल सकता है कि वह झूठ बोल रही है या सच? युवती से यह भी पूछा जाना चाहिए कि उसका आॅपरेशन किस अस्पताल में हुआ? अस्तपाल में कोई तो रिकॉर्ड होगा। पहले कहा जा रहा था कि उसकी किडनी निकाली गई है, लेकिन जांच में उसकी दोनों किडनियां सही सलामत हैं। अब यूट्रस निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है। बहरहाल, मामले की सही तरीके से जांच हो और जो भी दोषी पाए जाएं, उन्हें सख्त सजा मिले।
Saleem Akhter Siddiqui की कलम से। और मेरी ओर से राजीव त्यागी जी को समर्पित

Aaj Ki Baat !


औरंगजेब और गुरु गोविन्द सिंह
गुरु गोविन्द सिंह ने अमृतसर के दरबार साहेब को अपना केंद्र बनाया था। उनके पिता तेग बहादुर सिखों के नौवें गुरु थे। उन्होंने पंथ की हित साधना में अपना सर तक कटवा दिया था। अमृतसर का शहर मुगलकाल बादशाहों की अमलदारी के भीतर था। सरहिन्द का नवाब औरंगजेब का सूबेदार था। सरहिन्द के आस पास पहाड़ी हिन्दू रियासतें थीं। गुरु गोविन्द सिंह ने आन्नदपुर को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाया। पहाड़ी राजाओं के सिख प्रजाजन गुरु के दरबार में भेंट चढ़ाते थे। इन पहाड़ी राज्यों में गुरु गोविन्द सिंह के मसंद ( मसंद फारसी शब्द है जिसका अर्थ है मसनद या गद्दी ) रहते थे। मसनदों का काम था गुरु के भक्तों से भेंट लेकर गुरु के पास भेजना। सरहिन्द में भी गुरु का मसंद रहता था। सरहिन्द के मसंद और वहां दरबार में रहने वाले हिंदु राजा के प्रतिनिधियों में इसी बात को लेकर झगड़ा होता था राजा ने गुरु को लिखा “आपके मसंद हमारी रिआया से टैक्स वसूल कर रहे हैं आपको टैक्स वसूलने का हक नहीं है। आप अपने मसंदों का वापस बुला लीजिये”। गुरु गोविंद सिंह ने पता लगाकर पत्र का उत्तर दिया कि “मेरे मसंद किसी से कोई टैक्स वसूल नहीं करते, गुरु के भक्त जो उनको भेंट देते हैं उसे लेकर वे दरबार साहेब को भेज देते हैं किसी के यहां जाकर वे एक पैसा भी वसूल नहीं करते, मैंने पता लगा लिया है इसीलिये सर हिन्द से मसंद को वापस नहीं बुलाऊंगा”।
गुरु गोविन्द सिंह के जवाब के बाद मसंद और कर्मचारियों में झगड़े हुऐ मसंद मारा गया उसके मरने पर गुरु के भक्तों ने मसंद की मूर्तियों के लिये चढाई कर दी। गुरु की फौज में हिंदु सिख मुसलमान सभी थे। जिनमें मुसलमानों की संख्या अधिक थी। कई दिन तक लड़ाई जारी रहा, गुरु की फौज का पलड़ा भारी रहा। हिंदु राजाओं ने औरंगजेब को खबर भेजी “जहांपनाह हम आपकी रिआया हैं हम पर बागी गोविन्द सिंह ने हमला किया है आप मदद के लिये हुक्म भेजिये। औरंगजेब के दरबार में नंदलाल नामक मुंशी था औरंजेब ने नंदलाल से पूछा । यह क्या मामला है ?
नंदलाल – “जहांपनाह यह उनका मुकामी मामला है आपस में तय करें सल्तनत इसमें दखल न दें”।
औरंगजेब के इस इन्कार पर गुरु का प्रभाव और अधिक बढ़ गया हिंदू राजाओं ने मिलकर औरंगजेब को दोबारा लिखा। “ जहांपनाह अगर आप हमें मदद नहीं देंगे तो पंजाब के सबके सब हिंदू आपके हाथ से निकल जायेंगे”
औरंगजेब के सामने प्रश्न था पूरे पंजाब के हिंदुओं का इस बार मुंशी नन्दलाल की बात नहीं सुनी गई। 
दिल्ली से कुमुक पहुंचते ही गुरु गौविंद सिंह की सेना के पांव उखड़ गये लड़ाई में उनके दो पुत्र काम आये। गुरु गोविन्द सिंह ने आन्नदपुर छोड़ने का फैसला किया उनके साथ मां और उनके दो मासूम बेटे थे और रसोईया गंगू भी था। गंगू ने गुरु से प्रार्थना की कि “बच्चों और माता जी को मेरे पास छोड़ दीजिये मैं उन्हें हिफाजत से रख लुंगा।”
मुगल दरबार के नवाब नाजिम सर हिन्द में रहते थे उन्होंने ऐलान किया कि जो गुरु के दो मासूम बेटों को नाजिम के दरबार में पेश करेगा उसको भारी रकम ईनाम में मिलेगी। गंगू का दिल डोल गया उसने गुरु के दोनों बेटों में इनाम के लालच में नाजिम के दरबार में पेश कर दिया। 
बच्चों को लेकर नाजिम के दरबार में काफी बहस हुई नाजिम के दो सलाहकार थे एक मलेरकोटला के नवाब और दूसरा हिंदू दीवान। मलेरकोटला के नवाब ने कहा “हमारी लड़ाई गोविन्द सिंह से है इन बच्चों से नहीं इन्हें छोड़ देना चाहिये।” 
हिन्दू दीवान “सांप के बच्चे सांप होते हैं, इन्हें आपने छोड़ दिया तो हिंदू हमारे हाथ से निकल जायेंगे”।
एक मत के खिलाफ दो मतों से गुरु के दोनों बेटे जिंदा दीवार में चिनवा दिये गये, चिनने का हुक्म नाजिम ने दिया। उधर गोविन्द सिंह भागते हुऐ पंजाब की ओर जा रहे थे पहाड़ी राजाओं ने उन्हें पकड़वाने की कोशिश की और मुसलमानों ने उनकी जान बचाने की। मुसलमान भाईयों का एक बाग था इन दोनों मुसलमानों ने बाग के अंदर गोविन्द सिंह को ठहराया। एक दिन वे गुरु के साथ नाश्ता कर रहे थे कि मुगल सेना को पता चला कि गुर बाग में है। एक सवार बाग में आया, मुसलमान भाईयों ने गोविन्द सिंह से कहा “अपना साफा उतारकर टांगों में दबा लीजिये और बाल खोल दीजिये।“ सवार पास आया और भाईयों ने जवाब दिया “यहां कोई गोविन्द सिंह नहीं है”। सवार को शक हुआ उसने पूछ ये नंगे सिर वाला कौन है ? भाईयों ने जवाब दिया ये “हमारे उच्छ के पीर हैं” सवार को यकीन हो गया बोला पीर साहेब को मेरा सलाम इस तरह गुरु की जान बच गई । 
एक जगह, भाखड़ा नांगल से कुछ ऊपर एक छोटा सा गांव है वहां सड़क के किनारे एक मौलवी का घर था। मौलवी ने गोविन्द सिंह को अपने यहां छिपा लिया था मुगल सेना के सिपाही वहां भी पीछे – पीछे पहुंचे मौलवी ने अपनी जवान बेटी को पर्दे के पीछे बैठा दिया और उसी के पास गुरु जी को बैठा दिया। सैनिक आये पूछा “यहां गोविन्द सिंह है ” 
मौलवी – “यहां गोविन्द सिंह का क्या काम”
सैनिक ऊपर की मंजिल में गये पर्दे पास अटके फिर पर्दा हटाकर देखा पूछा – “यह कौन है”
मौलवी “इसमें मेरी लड़की और दामाद है” सैनिक हल्कि निगाह डाली और देखकर चला गयाइस तरह की कई घटनाऐं हुईं। कई दिन के बाद गुरु जी ने भागते हुऐ किसी मुकाम से औरंगजेब को फारसी कविता में फटकार के साथ एक खत लिखा । 30 – 40 सफ्हे का यह खत था इसका नाम है “जफरनामा” खत की कुछ लाईनें हैं 
“मनम कुश्तनी कोहिया पुरफितन
के आं बुतपरस्तां वो मन बुतशिकन।
अर्थात “ मारा मैं जाऊं और ये पहाड़ी हिंदू राजा फितने से भरे हैं। ये बुतपरस्त हैं और मैं बुतशिकन (मूर्तीभंजक) हूं। तुझे शर्म नहीं आती कि तूने इस मूर्तीपूजकों को मुझ मूर्तीभंजक के विरुद्ध मदद दी”।
खत जब औरंगजेब के दरबार में पहुंचा तो उसने पूछा कि ये “कौनसा मामला है” ? नन्दलाल “ जहांपनाह यह वही सरहिन्द का मामला है आपने दोबारा कहने पर कुमक भेज दी थी“ 
औरंगजेब “ गोविन्द सिंह कैसा आदमी है” 
नन्दलाल “ जहांपनाह अल्लाह वाला है बुतपरस्ती और शिर्क के खिलाफ है मवहिद है”
औरंजेब “ क्या मवहिद है ? तो कुमुक भेजना गलती हुई ?“ 
औरंगजेब ने जरा सोचकर कहा – “ सल्तनत की तरफ से फरमान जारी कर दो कि गोविन्द सिंह जहां चाहे रहकर, जिस तरह चाहे अल्लाह को याद कर सकता है। उसके साथ कहीं कोई मज़ाहत न हो।“ 
यह फरमान सारे हिन्दुस्तान में भेज दिया गया इस फरमान की कॉपी गुरु गोविन्द सिंह को मिल गई उनका छिपकर रहना समाप्त हो गया। लेकिन उन्हीं दिनों के करीब वे दक्षिण जाने का फैसला कर चुके है। उन्होंने खुले दक्षिण की यात्रा की। वहां नांदेड़ में दो पठानों के साथ उनका झगड़ा हुआ वहीं गुरु गोविन्द सिंह शहीद हुऐ और वहीं उनकी समाधी बनी। 
अब आप खुद तय कर लीजिये कि स्कूलों में पढ़ाया जाने वाला मनघड़ंत इतिहास से ये तथ्य कितने भिन्न हैं। 
भारतीय संस्कृति
मुगल विरासत : औरंगजेब के फरमान - लेखक बिशमंभर नाथ पांडे पेज नं. 122 – 125 (प्रकाशक हिंदी अकदमी दिल्ली)

Aaj Ka Pegam 📣


Tuesday, July 22, 2014

Aaj Ki Baat !

खुद अपने आप से अपने जुल्म को स्वीकारते संघी, वीएचपी गुंडे और खामोश बैठी व्यवस्था को आप क्या नाम देना चाहेंगे ? अभी दो दिन पहले अशोक सिंघल ने अल्पसंख्यकों से बहुसंख्यकों का सम्मान न करने के एवज में उनके वजूद के खत्म होने की चेतावनी दी थी। और आज तोगड़िया ने कहा कि गुजरात भूल गये मगर मुजफ्फरनगर तो याद होगा। एक लोकतांत्रिक देश में जिसका मीडिया सशक्त हो, उसमें आये दिन तथाकथित हिंदुत्व का दंभ भरने वाले अपने अतीत में किये पापों को बखान करते रहते हैं मगर अफसोस कहीं किसी के माथे पर एक शिकन तक नहीं आती। तोगड़िया खुद बता रहे हैं कि किस तरह मुजफ्फरनगर में उनके लड़ाकों ने निहत्थे मासूमों को मारा था। लेकिन फिर भी वे शान से जी रहे हैं। क्या न्याय पालिका से लेकर कार्यापालिका तक में इतनी भी हिम्मत नहीं की वह तोगड़िया जैसे जुबानी आतंकवादी को उठाकर जेल में डाल सके।

Aaj Ki Baat !

भूखे भक्त (लघु कथा)
कई दिन से ‘भक्त’ बहुत परेशान थे उन्हें उनका मन पसंद का भौजन मिले काफी समय गुजर गया था, यह भोजन किसी हांडी में नहीं बनता बल्कि ये दंगों की चाश्नी में लिपटा हुआ होता है, जिसमें मासूमों का खून, और महिलाओं के चीखने चिल्लाने की आवाज भी शामिल होती हैं, ये तथाकथित धर्माधिकारी भी उन धर्म के पुजारियों से अलग होते हैं जो किसी एकांतवास में पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर वासुधेव कुटुंबकुम का जाप करते हैं। मगर जिन्हें भूख लगी थी वे उनसे बिल्कुल अलग थे, उन्हें इससे मतलब नहीं था कि वासुधेव कुटुंबकुम क्या होता है ? उन्हें तो बस कुछ मासूमों का खून चाहिये, कुछ महिलाओं की जरूरत थी ताकि उनकी जिस्म की ज्वाला ठंडी हो सके, और तमाम उम्र फिर वे लोग वे उनके आतंक से सहमे हुऐ रहें । ये भक्त किसी भगवान रूपी दैवीय शक्ति के भी पुजारी नहीं थे बल्कि इन्होंने अपना भगवान तथाकथित धर्माधिकारी रूपी एक नेता को मान रखा था। वह था ही एसा जहां भी जाता अगले दिन वहां के भक्तों की भूख तो मिटती ही साथ ही चील, कौओं, गिद्धों, कुत्तों की भी भूख मिट जाती। कई दिन तक यह सिलसिला जारी रहता। आज भूखे भक्तों ने फिर उसी शख्स को बुलाया और उसने फिर अपने भाषण में खुद के भक्तों द्वारा किये गये अपने नरसंहार को दोहराया। मोहल्ले और गांव, बस्तियों, के लोग खौफजदा हैं, कहीं भूखे ‘भक्त’ उनकी बस्तियों की तरफ न आ जायें। 
नोट - इस कथा का तोगड़िया के बयान से मेल खाना संयोग माना जायेगा।

Aaj Ki Baat !

आज - आज में केवल 110 फिलस्तीनी मारे गये हैं इजरायली हमलों में अब मरने वालों की संख्या साढ़े चार सौ के पास पहुंच गई है घायलों की संख्या दो हजार से ऊपर हो गई है। इजरायल ने गजा को तबाह करके रख दिया है। तुर्किस्तान रूपी छोटे से देश को छोड़कर बाकी सारे देश खामोश हैं, भारत का स्टेंड में निराला है इन्हें कातिल से भी हमदर्दी है और मृतकों से भी। हिटलर को आदर्श मानने वाला संघी कबीला आज सोशल साईटों पर We Stand With Israeil लिखता फिर रहा है पाकिस्तान यू एन ओ को तलाश कर रहा है, आईओसी को तलाश कर रहा है, बाकी अरब देश अमेरिका के सामने नतमस्तक हो गये हैं। मुझे सऊदी के अरब के पूर्व राजदूत व शायर गाजी अल कसीबी की उस नज्म की पंक्ति आज अपना असर खोता दिख रही हैं जिसमें उन्होंने इजरायल को ललकारते हुऐ एक बार कहा था कि, अगर ये डेढ़ अरब मुसलमान एक साथ होकर चीखना शुरु कर दें तो इजरायल में भूकंप आ जायेगा। अगर ये एक साथ इजरायल की तरफ को कूच कर दें तो दुनिया की कोई ताकत इनके कदमों को नहीं रोक सकती, अगर ये एक साथ इकट्ठा होकर रोना शुरु कर दें तो इजरायल में इनके आंसुओं से सैलाब आ जायेगा। जाहिर है इन पंक्तियों में एक सच्चाई छिपी हुई थी। मगर सवाल यह पैदा होता है कि आज स्थिती कैसी है ? इजरायल अपनी मर्जी से निहत्थे और मासूमों फिलस्तीनियों पर बम बरसाता है फिर अपनी ही मर्जी से बंद हो जाता है। मगर दुनिया के किसी कोने में कहीं अफसोस होता नजर नहीं आता। क्या इन मासूम फिलस्तीनियों का खून इतना सस्ता है कि दुनिया का कोई मुल्क इनकी लाशों पर अफसोस जाहिर करना भी मुनासिब नहीं समझता ?

Aaj Ki Baat !

आज - आज में केवल 110 फिलस्तीनी मारे गये हैं इजरायली हमलों में अब मरने वालों की संख्या साढ़े चार सौ के पास पहुंच गई है घायलों की संख्या दो हजार से ऊपर हो गई है। इजरायल ने गजा को तबाह करके रख दिया है। तुर्किस्तान रूपी छोटे से देश को छोड़कर बाकी सारे देश खामोश हैं, भारत का स्टेंड में निराला है इन्हें कातिल से भी हमदर्दी है और मृतकों से भी। हिटलर को आदर्श मानने वाला संघी कबीला आज सोशल साईटों पर We Stand With Israeil लिखता फिर रहा है पाकिस्तान यू एन ओ को तलाश कर रहा है, आईओसी को तलाश कर रहा है, बाकी अरब देश अमेरिका के सामने नतमस्तक हो गये हैं। मुझे सऊदी के अरब के पूर्व राजदूत व शायर गाजी अल कसीबी की उस नज्म की पंक्ति आज अपना असर खोता दिख रही हैं जिसमें उन्होंने इजरायल को ललकारते हुऐ एक बार कहा था कि, अगर ये डेढ़ अरब मुसलमान एक साथ होकर चीखना शुरु कर दें तो इजरायल में भूकंप आ जायेगा। अगर ये एक साथ इजरायल की तरफ को कूच कर दें तो दुनिया की कोई ताकत इनके कदमों को नहीं रोक सकती, अगर ये एक साथ इकट्ठा होकर रोना शुरु कर दें तो इजरायल में इनके आंसुओं से सैलाब आ जायेगा। जाहिर है इन पंक्तियों में एक सच्चाई छिपी हुई थी। मगर सवाल यह पैदा होता है कि आज स्थिती कैसी है ? इजरायल अपनी मर्जी से निहत्थे और मासूमों फिलस्तीनियों पर बम बरसाता है फिर अपनी ही मर्जी से बंद हो जाता है। मगर दुनिया के किसी कोने में कहीं अफसोस होता नजर नहीं आता। क्या इन मासूम फिलस्तीनियों का खून इतना सस्ता है कि दुनिया का कोई मुल्क इनकी लाशों पर अफसोस जाहिर करना भी मुनासिब नहीं समझता ?

Aaj ke Baat !

लोगो का कहेना है की जो लोग अंग्रेजी बोलते है वो बहुत समझदार और पढ़े लिखे होते है।आज पहेली बार एक ऐसा इंसान देख रहा हूँ जिसके मन में तिरंगे का अपमान तो भरा हुआ है और अपनी संघी मानसिकता को भी दिखा रहा है तुम जैसे घटिया लोगो की वजहा से हिन्दुस्तान की धज्जियाँ उड़ी हुई है सबसे ज्यादा तुम मक्कारो ने विदेशों में पैसा जमा किया है और अवाम को मज़हब के नाम पर उलझा रक्खा है कभी झंडे के नाम पर उल्लू बनाते फिरते हो और अपने आपको हिन्दू भाई लोगो का अलमदार कहेते हो तुम जैसे लोगो ने मुल्क़ को सिर्फ दंग्गा और नफ़रत ही दिया है मज़हब के बीच में एक ऐसी राजनीति खेली है की आम इंसान तुम्हारी मक्कारी में आ जाता है अगर तू झंडा हर तरफ फैरायेगा तो इस बार 15 अगस्त को लाल किले पर फहेरा देना दिखा देना की जो कहा वो कर के दिखा दिया मियां औकात के अन्दर बात किया करो औकात वाली बात पूरी हो जाती है उसके बाहर की बात न किया करो नहीं तो नेकर फट जाती है अपने अलम्दारो से कहो विकास के पापा कहाँ है कब आएगा विकास कहाँ है विकास किधर जा कर चुप गया विकास अपनी ज़ात दिखाना शुरू कर दिया।भाई मुहं से बात अच्छी लगती है। वो जगह रिया ख़ारिज करने की है।इसलिए मुहं से बात किया करो। नहीं तो एक दिन जनता तुमको सड़को पर कुत्ते की तरहा पिटेगी उस दिन तुमको पता चलेगा की कहाँ से क्या किया जाता है समझ गए संघियों की गुलामी छोड़ो गाँघी वादी न बन सको तो कम से कम हिन्दुस्तानी ही बन कर दिखा दो मियां

Aaj Ki Baat !

और इसी गहमागहमी के बीच एक और शर्मनाक कुकर्म किया है शिवसेना के सांसदों ने उन्होंने महाराष्ट्र सदन में मुस्लिम कर्मचारी को जबरदस्ती रोटी खिला उसका रोज़ा तुड़वाया। जाहिर है यह कार्य कोई अनपढ़ या मानसिक रूप से गुंडा करता तो इस पर इतना अफसोस न होता मगर ये कार्य उन लोगों ने किया है जो भारत जैसे विशाल देश की पंचायत के सदस्य हैं। ........ अच्छे दिन की तमन्ना रख के इन जैसे सामाजिक गुंडों को वोट देने वालों ... लानत है तुम पर ...