यु ए ई में अबुधाबी राजा द्वारा मंदिर के लिए जमीन देने की बात पर अंधभक्त
ऐसे बंदर की तरह उछल उछल कर नाच रहे हैं जैसे कुत्ते को जमीन पर लोटने से
कोई पुरानी खुजली मिट गई हो । और व्हाट्सऐप और फेसबुक पर मैसेजों को इस तरह
फैलाया जा रहा है " मोदी से डर कर अबुधाबी के राजा ने मंदिर के लिए जमीन
दि है "
तो चमन चुतीयों तुम्हारी जानकारी के लिए बता दुँ यु ए ई के रियासत दुबई में मंदिर तब से है जब तुम्हारा मोदी पैदा भी नहीं हुआ था । दुबई सिटी में एक जगह है डेरा जहाँ मंदिर आज भी है । और हिन्दु भाई अपने हर पर्व पर पुजा के लिए मंदिर जाते हैं जहाँ सुरक्षा और हर तरह की ईंतेज़ाम की जिम्मेदारी वहाँ की स्थानीय पुलीस की होती है ।
वही कंडीशन ओमान की राज़धानी मसकत का भी है । क़तर की राज़धानी दोहा में भी मंदिर है । और कोई हिन्दु भाई कह दे की ईन सब जगहों पर किसी भी तरह की परेशानी होती हो ? तो मै पुरी ज़िन्दगी गुलामी करने को तैय्यार हुँ ।
मुस्लिम देश हों या मुस्लिम राजाओं द्वारा भारत पर शाषण । कभी भी किसी धार्मिक स्थल को दिवार नहीं बनाया गया । ईस बात का तो ईत्तिहास भी गवाह है । पर जिसने सही ईत्तिहास पढ़ा हो तब । आर एस एस और बजरंग दल के इत्तिहास में नहीं ।
पर कुछ टुच्चों के हाथ में देश की बागडोर जाते ही धर्मीक कट्टरता और हैवानियत की सिमा पार हो चुकी है । घटीया सोंच वालों ने पिछवाड़े से नहीं मुंह से हगना शुरू कर दिया है ।
तुम उन लोगों को अमन का तरीका सिखा रहे जहाँ इंसानियत को ही अमन समझा जाता है । पर तुम्हे शर्म कहाँ जब राष्ट्र वादियों द्वारा किसी एक समुदाय के लिए ज़हर उगला जाता हो ।
#नसरूद्दिन सिद्दीक़,
तो चमन चुतीयों तुम्हारी जानकारी के लिए बता दुँ यु ए ई के रियासत दुबई में मंदिर तब से है जब तुम्हारा मोदी पैदा भी नहीं हुआ था । दुबई सिटी में एक जगह है डेरा जहाँ मंदिर आज भी है । और हिन्दु भाई अपने हर पर्व पर पुजा के लिए मंदिर जाते हैं जहाँ सुरक्षा और हर तरह की ईंतेज़ाम की जिम्मेदारी वहाँ की स्थानीय पुलीस की होती है ।
वही कंडीशन ओमान की राज़धानी मसकत का भी है । क़तर की राज़धानी दोहा में भी मंदिर है । और कोई हिन्दु भाई कह दे की ईन सब जगहों पर किसी भी तरह की परेशानी होती हो ? तो मै पुरी ज़िन्दगी गुलामी करने को तैय्यार हुँ ।
मुस्लिम देश हों या मुस्लिम राजाओं द्वारा भारत पर शाषण । कभी भी किसी धार्मिक स्थल को दिवार नहीं बनाया गया । ईस बात का तो ईत्तिहास भी गवाह है । पर जिसने सही ईत्तिहास पढ़ा हो तब । आर एस एस और बजरंग दल के इत्तिहास में नहीं ।
पर कुछ टुच्चों के हाथ में देश की बागडोर जाते ही धर्मीक कट्टरता और हैवानियत की सिमा पार हो चुकी है । घटीया सोंच वालों ने पिछवाड़े से नहीं मुंह से हगना शुरू कर दिया है ।
तुम उन लोगों को अमन का तरीका सिखा रहे जहाँ इंसानियत को ही अमन समझा जाता है । पर तुम्हे शर्म कहाँ जब राष्ट्र वादियों द्वारा किसी एक समुदाय के लिए ज़हर उगला जाता हो ।
#नसरूद्दिन सिद्दीक़,
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